ये हैं नम्बरदार जी के नाम से मशहूर श्री इन्दरसिंह जो जगास गांव से संबंधित हैं। ये टिपीकल वेषभूषा एवं मूंछ दाढी की बनावट से नहीं बल्कि एक मशहूर पहाडी गीत के रचयिता एवं गायक के रूप में जाने जाते हैं।
अपने जमाने का यह है मशहूर गीत, "मेरी जान भाभिए, आगे ओ तेरे मोरजे" । इसे कई गायकों ने रेडियो स्टेशन से भी गाया है। नम्बरदार जी स्वयं इसे मंचों पर गाते थे।
यह जानकारी मतियाना राजगढ के लोक गायक एवं नर्तक श्री रवींद्र वर्मा ने दी।
ये हैं एक सदाबहार पहाडी भजन " किले रे कदावणे जोलो पाणी रे दीवे नारणा, पूजा कोरणे बिजटो रे" के रचयिता एवं आकाशवाणी से गाने वाले चेवडी गांव के स्वर्गीय श्री रत्तीराम जी। आज लोकनृत्य का शुभारंभ इसी भजन से होता है। इनके साथ एक और इतिहास भी जुडा है। डा० परमार के अकेलेपन को दूर करने के लिए, सत्या डांग को सत्या परमार बनाना, इनके ही प्रयासों का परिणाम था। रत्तीराम जी हंसमुख व्यक्तित्व के मालिक थे। वे रेणुका से एमएलए के लिए आजाद उम्मीदवार भी खडे हुए थे। करयाला के भी कलाकार थे।
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